अपने अपने ही रहे, न दिन देखें न रात ||
दिन देखें न रात, सदा ही सुन-ने को तैयार|
बात तुम्हारी एक हो, चाहे बात तुम्हारी चार||
Prashant Bhardwaj, Jan'11


dil to karta hai ke dil na kare,
phir dil hi kehta hai ke dil kar raha hai
दिल तो करता है के दिल न करे,
फिर दिल ही कहता है के दिल कर रहा है