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09/01/11

ज्ञानचंद दोहेवाले

जब भी दिल करे बोलने का, करो अपनों से बात |
अपने अपने ही रहे, न दिन देखें न रात ||
दिन देखें न रात, सदा ही सुन-ने को तैयार|
बात तुम्हारी एक हो, चाहे बात तुम्हारी चार||

Prashant Bhardwaj, Jan'11

06/01/11

ज्ञानचंद दोहेवाले

कॉरपोरेट जगत मूया, लगा राजनीती खेल |
पीठ के पीछे गाली देवत, सामने पड़े तो मेल ||

Prashant Bhardwaj, Jan'11

26/11/09

ज़िन्दगी तेरे नाम

और एक दिन
और एक शाम
तेरे नाम

ज़िन्दगी

तू न होती तो कुछ भी न होता
ना हंसी ना ख़ुशी और ना सदमा होता
बस वक़्त होता
गुज़रा हुआ
और गुज़रने वाला

तू न होती तो कुछ भी न होता
ना किसी चीज़ की ख्वाहिश
ना दिल में कोई अरमां
बस अँधेरा
गहरा
काला

पर तू है
मेरी है
मेरे वजूद की वजह
मेरी हंसी
मेरी ख़ुशी
मेरा ग़म
मेरी आवाज़
मेरी ख़ामोशी

एक और दिन
एक और शाम

ज़िन्दगी

तेरे नाम

जनाब शायर प्रशांत भारद्वाज बुलंदशहर वाले आप लोगों से कुछ दिन के लिए इजाज़त लेते हैं...
फिर मिलेंगे

हम लोग!

सुश्री मयूरी चतुर्वेदी से प्रार्थना है के कृपया चाय की दुकान के आगंतुकों के लिए एक नूतन वेबदैनिकी चिटठा लिखें!

14/08/09

Pandit Om Vyas Om

Beta bata Madras ka naam chennai kyon pada?
Uncle, Madras ke log lungi pehente hain... aur lungi mein "chain"-"nai" hoti :D

Another amazing poet who writes in Hindi... Subbu this should make you happy :) there is some Hindi around !!!

Thank you Vaishali for posting the link in her comment...



Om Vyas Om is not there in this world anymore, I am very sad to know this! :(

14/04/09

सब कुछ हो फिर भी सब न हो

जो अब तक होता आया
वो शायद अब न हो
ज़िन्दगी के लम्बे सफ़र में
दुःख भरी कोई शब् न हो

बचपना है प्यार है
यारी है दोस्ती है
हंसी है ख़ुशी है
उम्मीदें है ख्वाहिशें हैं

सपनो के टूटने पर
उम्मीदों के छूटने पर
उतना दर्द
शायद अब न हो

एक रास्ता था वो भी
एक रास्ता है ये भी
उस राह के छूटने पर
अकेलापन शायद अब न हो


नयी मंजिलों का इंतज़ार है
नयी राहों से मुझे प्यार है
इन राहों पर मिलने वाली मंजिलों में
सब कुछ हो
फिर भी सब न हो


प्रशांत भारद्वाज
अप्रैल २००९

12/02/08

wah wah :P

dil to karta hai ke dil na kare,

phir dil hi kehta hai ke dil kar raha hai


दिल तो करता है के दिल न करे,

फिर दिल ही कहता है के दिल कर रहा है

Isn't having a blog the best thing EVER... i can write about what i thought, what i said, what i wrote... and be assured (unless blogger deletes it) that I will have it for a long long time :P

01/12/07

कुछ ऐसा करने का dil करे

dil का अरमान के खुली हवा हो ...

और उसे सांस मे भर लेने का dil करे

आखों के आगे न ज़मीन हो न आस्मान ...

और चलते चले जाने का dil करे

ऊपर देखूं तो कुछ तारे मुझसे बात करने के लिए नीचे हो जाएँ ...

और मेरा sirf उनको niharne का dil करे ...

कहीं दूर पहाड़ के पीछे से बांसुरी की आवाज़ आये ...

और मेरा भी कुछ गाने गुनगुनाने का dil करे ...

कहीं दूर एक झरने से पानी के गिरने की आवाज़ आ रही हो ...

और उस आवाज़ मे खो जाने का dil करे ...

एक् रेलगाडी की सीटी सन्नाटे को चीरते हुए मेरे कानो तक पहुंचे ...

और फिर वापस घर जाने के dil करे ...

+++++++++++++++++++++++++

Dil ka armaan ke khuli hawa ko...

aur Saans lene ka dil kare

aakhon ke aage na zameen ho na aasman...

aur chalte chale jaane ka dil kare

upar dekhoon to kuch taare mujhse baat karne ke liye neeche ho jayen...

aur mera sirf unko niharne ka dil kare...

Kahin door pahad ke peeche se baansuri ki aawaz aaye...

aur mera bhi kuch gaane gungunane ka dil kare...

kaheen door jharne se paani ke girne ki aawaz aa rahi ho...

aur us aawaz mein kho jaane ka dil kare...

ek railgaadi ki seeti sannate ko cheerte hue mere kaano tak pahunche...

aur phir wapas ghar jaane ke dil kare...