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27/04/10

देखो एक बेचारा

सुबह सवेरे उठकर, बॉस फाइल अभी लाया चिल्ला रहा है!
देखो एक बेचारा काम पर जा रहा है!

सपने में भी मीटिंग्स schedule और reschedule करा रहा है!
देखो एक बेचारा काम पर जा रहा है!

रोज़ सुबह रोज़ शाम
ट्राफ्फिक में फसा हुआ
इधर से उधर और उधर से इधर जाते लोगों को देख
बिना सोचे समझे होर्न बजा रहा है
देखो एक बेचारा काम पर जा रहा है!

रविवार की सुबह से ही सोमवार की सुबह का ग़म उसे तडपा रहा है!
देखो एक बेचारा काम पर जा रहा है!

शाम होने तक न उससे कुछ समझ आता, न वो कुछ समझा पा रहा है!
देखो एक बेचारा काम पर जा रहा है!

इश्क मोहब्बत प्यार इज़हार
ऐसे लफ़्ज़ों का future उससे सिर्फ अन्धकार में नज़र आ रहा है!
देखो एक बेचारा काम पर जा रहा है!

जो करना नहीं चाहता वो ही किये जा रहा रहा है!
देखो एक बेचारा काम पर जा रहा है!

जो करने का दिल करता है, बस वही नहीं कर पा रहा है!
देखो एक बेचारा काम पर जा रहा है!

25/01/09

और कहीं दिन बीते...




आज सोया तो सपने में सपना था...

के
नींद खुले तो कहीं और...


किसी और शहर में...
किसी
पहाड़ की गोद में...

किसी
नदी के किनारे...

कहीं
दूर किसी स्टेशन पर चाय चाय की आवाज़ से..

किसी
छोटे बस स्टैंड पर पकोडे की खुशबु से...

बस
कंडक्टर की सीटी से...





और
दिन बीते कहीं
बातें
करते

किसी
छोटी सी गली में घूमते घूमते

एक
छोटी सी चाय की दुकान पर बातें सुनते

चाय
पीते रस खाते मट्ठी खाते
और
फिर एक और प्याली चाय पीते

कुछ
राह चलते लोगों की खेरियत पूछते

कुछ
बच्चो के साथ पिट्ठू खेलते

कहीं
एक नाव में नदी पार करते

किसी
खेत में एक डंडी लेकर घूमते

गाँव
में सर्दी की मीठी मीठी धुप का मज़ा लेते



और कहीं दिन बीते...