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24/09/11

सिस्टम की कहानी (System ki Kahani)

मेरा होश सँभालते ही, मासूमियत के समझदारी में बदलते ही
एक दुश्मन से मुलाकात हुई
क्या नाम दूं उसे ये समझ पाने की मुशक्कत में
रात से दिन और दिन से रात हुई

फिर एक दिन शाम को आवारागर्दी करते हुए
एक दोस्त से एक शिकायत सुनी
भाई बोला - यार गलती मेरी नहीं है| ये साले सिस्टम की है||

अगस्त में पढ़ाओ, फिर दश्हेरा, दिवाली, क्रिसमस की छुट्टी दो,
अप्रैल में परीक्षा लो, और पास नहीं हुए तो गाली दो|
अब मैंने थोड़े ही कहा है एक साल का इंतज़ार करो
पढ़ाओ, और पूछ लो
ना बता पाएं तो पीट लो
पर नहीं, सिस्टम ही ऐसा है के साल भर पढ़ कर ही फेल हो सकते हो पहले नहीं
ये साला सिस्टम ही ख़राब है

तब समझ में आया, के स्कूल एक सिस्टम है
सिस्टम का जो दिल करे जब दिल करे,
कर सकता है और करवा सकता है
पूरी बाल्टी पानी की खाली करके, फिर भरवा सकता है

ये समझ में भी आया के सिस्टम ज़्यादातर ख़राब ही होता है
न किसी की सुनता न समझता है
सिर्फ अपने कायदे और अपने कानून से ही चलता है

सोचने समझने में शाम से रात हो गई
सिस्टम और उसकी तानाशाही आई गई बात हो गई||

08/09/11

of today!

सुना था के एक वाकया काफी है ज़िन्दगी बदलने के लिए |

इस मुल्क में न वाकयों की कमी है न जिंदगियों की ||

15/02/11

ज्ञानचंद दोहेवाले

साधू संत सब कह गए, दिल को रखिये साफ़ |
जो करेगा सो भरेगा, आप कीजिये सबको माफ़ ||

Prashant Bhardwaj, Feb'2011

09/02/11

9 2 11 (नौ दो ग्यारह )

Have been trying to find the origin of 9-2-11 since morning... have asked a few colleagues at work as well!

but no go!

Anyone knows when and how did the phrase 9-2-11(नौ दो ग्यारह ) originate?

Why this post today? Well! today is 9-2-11! that's why!

09/01/11

ज्ञानचंद दोहेवाले

जब भी दिल करे बोलने का, करो अपनों से बात |
अपने अपने ही रहे, न दिन देखें न रात ||
दिन देखें न रात, सदा ही सुन-ने को तैयार|
बात तुम्हारी एक हो, चाहे बात तुम्हारी चार||

Prashant Bhardwaj, Jan'11

27/04/10

देखो एक बेचारा

सुबह सवेरे उठकर, बॉस फाइल अभी लाया चिल्ला रहा है!
देखो एक बेचारा काम पर जा रहा है!

सपने में भी मीटिंग्स schedule और reschedule करा रहा है!
देखो एक बेचारा काम पर जा रहा है!

रोज़ सुबह रोज़ शाम
ट्राफ्फिक में फसा हुआ
इधर से उधर और उधर से इधर जाते लोगों को देख
बिना सोचे समझे होर्न बजा रहा है
देखो एक बेचारा काम पर जा रहा है!

रविवार की सुबह से ही सोमवार की सुबह का ग़म उसे तडपा रहा है!
देखो एक बेचारा काम पर जा रहा है!

शाम होने तक न उससे कुछ समझ आता, न वो कुछ समझा पा रहा है!
देखो एक बेचारा काम पर जा रहा है!

इश्क मोहब्बत प्यार इज़हार
ऐसे लफ़्ज़ों का future उससे सिर्फ अन्धकार में नज़र आ रहा है!
देखो एक बेचारा काम पर जा रहा है!

जो करना नहीं चाहता वो ही किये जा रहा रहा है!
देखो एक बेचारा काम पर जा रहा है!

जो करने का दिल करता है, बस वही नहीं कर पा रहा है!
देखो एक बेचारा काम पर जा रहा है!

08/01/10

मज़ा ही कुछ और है!!

This is dedicated to one of my favorite poets, Pandit Om Vyas Om. He wrote a poem "Maza hi kuch aur hai" and I wrote what is below!

डिब्बे और बाल्टी से नहाने का
ठिठुरते शरीर पर लिफेबोय साबुन लगाने का
ठंडा पानी लगने पर जोर से जय राम जी की जय राम जी की चिल्लाने का

मज़ा ही कुछ और है|

चलती डी टी सी में भाग कर चड़ने का
छुट्टे ना देने पर कांदुक्टोर से झगड़ने का
खिड़की से आ रही ठंडी हवा पर हथेली आपस में रगड़ने का

मज़ा ही कुछ और है|

धुंध में सामने वाली गाडी के पीछे पीछे चलने का
थोड़ी सी सड़क साफ़ होते ही फटाक से आगे निकलने का
और कोई खुद से आगे निकले तो गाली बकने का

मज़ा ही कुछ और है|

ठेले की बगल में टिक्की खाने का
गोलगप्पे में थोड़ी सौंठ डलवाने का
मिर्चा लगने पर सी सी करके चिल्लाने का

मज़ा ही कुछ और है|

रजाई में दुबके रहने का
मोबाइल फ़ोन पर सबसे छुपा कर धीरे धीरे कुछ कहने का
किसी के प्यार में थोडा सा गम सहने का

मज़ा ही कुछ और है|

देसी घी में खाना बनाने का
तंदूरी परांठे पर सफ़ेद मक्खन लगाने का
पेट भर कर खाने के बाद, बस एक और गुलाब जामुन खाने का

मज़ा ही कुछ और है|

गली के कोने वाली मार्केट में बाल कटवाने का
१० रूपये में शेव करने का
ओल्ड इसपाईस की बोतल में रखा सस्ता आफ्टर शेव लगवाने का

मज़ा ही कुछ और है|

organic की जगह herbal शेम्पू लगाने का
"over the counter " की जगह आयुर्वेदिक दवाई खाने का
बीमार पड़ने पर घर के नुस्खे आजमाने का

मज़ा ही कुछ और है|

17/11/09

Do ke Pahaade

2 ones are 2
2 twos are 4
naah...



2 oneza too
2 toozaa foor
2 threezaa siiix
2 forza eeeeight
2 fiveza teeen
2 sixza twwwwelve
2 sevenza foorteeen
2 ate-za sixteeeen
2 nine-za eighteeeen
2 tenza twenty



ikk duni do
do duni chaar
tinn duni che
chaar duni aath
punj duni dus
che duni baraanh
sat duni chaudanh
aath duni solanh
nau duni athaaranh
dus duni veeh!


2 ekum do
2 dooni chaar
2 tiya che
2 chawke aath
2 panje dus
2 chikke baraa
2 satte chaudhah
2 atthe solah
2 nimme at-tharah
2 dhain bees

and while we are at it... why don't we sing along with my favorite Shammi Kapoor!!!


29/10/09

Patekar Barishkar!

ध्रिष्ट्ध्युमं पद्मनाभ प्रजापति नीलकंठ धूमकेतु बारिशकर (Dhristdhyumna Padmanaabh Prajapati Neelkanth Dhoomketu Barishkar)is one of my favorite names and characters in Hindi Cinema!!! I remember trying to recall his complete name in the movie so many times in college....

For the ones who do not know or do not remember, this was the on-screen name of Nana Patekar's character in "थोड़ा सा रूमानी हो जाएँ" (Thoda sa Romani ho Jayen). The movie was directed by Amol Palekar and released in 1990.

Enjoy Nana's entry in the movie about 2 minutes into the clip below... If possible, do try to get hold of the movie and watch it too (its on youtube too).. will take some mood to enjoy the movie, but its fantastic!




24/10/09

हिंदी की कक्षा

नीचे लिखी कुछ पंक्तियों का विशलेषण और व्याख्या करें

मेरी भैंस को डंडा क्यों मारा
मेरी भैंस को डंडा क्यों मारा

वो खेत में चारा चरती थी
तेरे बाप का वो क्या करती थी

तेरी भैंस ने इतना दूध दिया
मेरा लोटा उसमे डूब गया!

तेरी भैंस को डंडा यूं मारा !!!
____________

इस पोस्ट पर मिली प्रतिक्रिया मुझे ऐसा प्रतीत करा रही हैं, जैसे कुछ व्यक्ति विशेष इस गाने के बारे में नहीं जानते!

ये गीत है, १९७० (1970) में बनी फिल्म "पगला कहीं का" से! संगीत दिया है शंकर जयकिशन ने और आवाज़ है मेरे प्रीय मन्ना डे की! लोटे वाली लाइन इस गाने में नहीं हैं... वो मेरे मामाजी की हैं !!!


05/09/09

आओ मिलो शीलो शालो, कच्चा धागा रेस लगा लो !

हम थोड़ा सा घूम कर आते हैं !!!


बस कुछ ही महीने बचे हैं सर्दी आने में... जरा मजे ले लें इस बचे कुचे गर्मी के मौसम के !!!

चाय की जो दुकान है... वो जरा - दिन बंद रहेगी... या के यूं कहिये... ताजा चाय नहीं मिल पायेगी... जो अभी है, वो दिल खोल कर एन्जाई कीजिये आप लोग !!!

फिर मिलते हैं...

हम लोग !!!!

25/01/09

और कहीं दिन बीते...




आज सोया तो सपने में सपना था...

के
नींद खुले तो कहीं और...


किसी और शहर में...
किसी
पहाड़ की गोद में...

किसी
नदी के किनारे...

कहीं
दूर किसी स्टेशन पर चाय चाय की आवाज़ से..

किसी
छोटे बस स्टैंड पर पकोडे की खुशबु से...

बस
कंडक्टर की सीटी से...





और
दिन बीते कहीं
बातें
करते

किसी
छोटी सी गली में घूमते घूमते

एक
छोटी सी चाय की दुकान पर बातें सुनते

चाय
पीते रस खाते मट्ठी खाते
और
फिर एक और प्याली चाय पीते

कुछ
राह चलते लोगों की खेरियत पूछते

कुछ
बच्चो के साथ पिट्ठू खेलते

कहीं
एक नाव में नदी पार करते

किसी
खेत में एक डंडी लेकर घूमते

गाँव
में सर्दी की मीठी मीठी धुप का मज़ा लेते



और कहीं दिन बीते...

26/11/08

मिर्च मसाला

क्या होता है, क्यों होता है,
कोई पाता है, कोई खोता है,

हस्ता है कोई रोता है,
जागता है कोई सोता है,

सपनो में सपने पिरोता,
अपनी नैय्या ख़ुद डुबोता

उल्टा सीधा अपलम चपलम
हर पल ये मतवाला है

वो जीना भी, कोई जीना है,
जो बिना मिर्च मसाला है !!!!


I for some reason cannot recall what this program was about, even though I remember this ingle and humm this often :) ... Mirch Masala !!! Refresh my memory someone please !!

27/07/08

चाय का फार्मूला

दूध चीनी रोक के !
चाय पत्ती ठोक के !!


(This translates to, less sugar and milk, and stronger tea)


Thats the key to a good regular tea !!!

Funny how people react to these lines when I speak them every time someone is preparing tea for me... :)


This is a wonderful ice breaker too !!!


next time you are sitting on a tea stall and feeling out of place... just speak this to the chai wala and jump start your conversation !!!

Listening to Manna Dey on Raaga today !!! lovely

14/04/08

Meri Jaan Jeenat Amaan !!!!

Ab jaan le legi kaa chori !!!!

Arre hai re meri jhumri tallaiyaa !!!

When you are listening to some songs, the ones that I mentioned in one of my previous posts, in addition to the simplistic lyrics, the basic instruments like the dholak, harmonium etc, its the filler lines lines like the two above that give them the perfect mood !!!

Have been listening to Dekhta hai tu kya for a couple of days now, and I still love it... Super energy, and fun !!!

Pity that I am not with a group of friends dancing on this number ! soon... sometime soon...

Jai Chichorgardi on the dance floor !

23/12/07

What Completes?

A friend asked me a while ago, Prashant what completes you? and I could not answer that.. there is so much... too much of space around that needs to be filled !!!

Small question, big answer...

It however helped a few words come out and fill some empty space.. here they are.. enjoy :) and feel free to add...

पहाड़ की चोटी
नदी का किनारा
चुप चुप बैठा था
तभी साला किसी ने पत्थर मारा
देखा तो मेरा बॉस था
मुझे कुछ होश था
याद आया ईमेल नहीं करी ...
ख़ुशी की मछली तभी उस नदी मे मरी
मैं वापस काम पर
आगे बदने के नाम पर
अभी तक काम कर रह हूँ
एक एक दिन करके जीवन से गुज़र रहा हूँ
और ख़ुशी की मछली वही किनारे पर रह गई
जितनी तस्सली दिल मे थी वो कहीं उस गहरे पानी की धारा मे बह गयी